आज न्यूज़ पेपर पढ़ रहा था- रेल से कट कर यूवक ने दी जान ।।पूरा ब्यौरा जाँचने पर मालूम हुआकि वो लड़का एकलड़की के चक्कर में था ,इसी कारण सुसाइड किया.....मन ही मन बहुतगुस्सा आया..........मित्रों एसे बहुत से लडको को देखा है,जो लड़कियों के ठुकरा देने पर अपने हाथ- पैर ब्लेड सेकाटते रहते हैं....आज कल के नौजवानोँको इतनी समझ नही हैकि ताली दोनों हाथों सेबजती है...अगर शरीर मेँ रक्त ज्यादा हैँतो रक्तदान करदो ना ,,ब्लेड से हाथ क्योँ चीरते हो ?.अंग्रेजी में एक कहावत है,"उनके लिए मत रोवो जो तुम्हेधोखा देते हैँ ,,बस उन्हें शुक्रिया कहो कि वो तुम्हेएक मौका देते है कि तुम उनसेभी अच्छा एकजीवनसाथी खोज पाओ".और ये कैसे नोजवान हैँ जो देश के लिएनहीँ मर सकतेपर लडकियों के लिए मर जाते है ?ये देश के लिए कुछ नहीँ करते बसआबादी बढ़ाते हैँ।मेरी नजर मेँ इनकी कोई कीमतनहीँ है. आज हमारे देशको नौजवानो की आवश्यक है.....जय_हिंद....जय_भारत
-विशाल परमार
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